च्युइंग गम चबाना आपके सेहत के लिए कैसे है खतरनाक?

च्युइंग गम या बबल गम चबाना आज कल ट्रेंड बन चुका है। जब लोग टाइम पास करना चाहते हैं तब इसका सहारा लेते हैं, या कोई अपनी मुंह की बदबु को छुपाने के लिए भी इसका सहारा लेता है, और तो और कुछ लोग बस टशन (स्टाइल) दिखाने के लिए भी च्युइंग गम को चबाते नज़र आते हैं।

बहुत लोगों से आपने यह कहते हुए सुना होगा कि च्युइंग चबाने से दांत मज़बूत होते हैं, शाइन करते हैं और साथ ही गंदी बदबू की समस्या भी दूर हो जाती है… एक हैप्पी स्माइल की दवाई के रूप में लोगों द्वारा इस्तेमाल होता है यह च्युइंग गम।

आज हम आपको च्युइंग चबाने की आदत के बारे में ही बताने जा रहे हैं कि आखीर च्युइंग गम चबाना सेहत के लिए कैसे है खतरनाक???

दोस्तों जिसे आप टाइमपास या फैशन की चीज़ मानते हैं च्युइंग गम… यह दरअसल, आपकी सेहत के लिए बहुत खतरनाक है। आप तो बिना सोचे-समझे इसे रोजाना चबाए चले जाते हैं लेकिन आज जब आप इसके साइड एफेक्ट्स के बारे में जानेंगे तो अभी के अभी इसे चबाना छोड़ देंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि च्युइंग गम या फिर बबल गम में मौजूद होते हैं फूड एडिटिव, जिनकी वजह से आपको कोलोरेक्टल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार च्युइंग गम या मेयोनीज जैसी चीजों में वाइटनिंग एजेंट का इस्तेमाल किया जाता है जिसके कारण आपको पेट में जलन और पेट से ही जुड़ी कई बीमारी व साथ ही कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।

E171 का इस्तेमाल च्युइंग गम में क्यों होता है –

च्युइंग गम में E171… जिसे टाइटेनियम डाइऑक्साइड नैनोपार्टिकल्स भी कहते हैं इसका प्रयोग किया जाता है। यह एक फूड एडिटिव है जिसका इस्तेमाल वाइटनिंग एजेंट के तौर पर बड़ी मात्रा में खाने-पीने की कई चीजों और यहां तक की दवाईयों में भी होता है।

बता दें कि इस फूड एडिटिव का हमारे स्वास्थ्य पर काफी बुरा असर होता है और इस बात को प्रूफ करने के लिए चूहों पर भी एक स्टडी की गई थी। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि E171 का इस्तेमाल 900 से भी ज्यादा फूड प्रॉडक्ट्स में होता है और आम लोग हर दिन बड़ी संख्या में इस फूड एडिटिव का सेवन भी करते हैं।

यही नहीं, फ्रंटियर्स इन न्यूट्रिशन नाम के जर्नल में भी प्रकाशित इस स्टडी के अनुसार ऐसे फूड आइटम्स का सेवन करना जिसमें E171 फूड एडिटिव शामिल हो किसी जानलेवा से कम नहीं है क्योंकि इसका सीधा असर हमारी आंतों पर पड़ता है। बताते चलें कि इसकी वजह से पेट से जुड़ी कई बीमारियां और कोलोरेक्टल कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने की भी आशंका बनी रहती है।

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