14 फरवरी – ऑर्गन, आई और टिशू डोनर डे पर करें अंगदान!

हमारे देश में बहुत कम ऐसे लोग हैं जो अंगदान करते है। अगर अंगदान की भावना को बढ़ाया जाए तो हजारों लोगों की जिंदगी आसानी से बचाई जा सकती है। जहां कभी ऑर्गन फेलयर के चलते, तो कभी एक्सीडेंट के कारण ऑर्गन ट्रांसप्लांट बहुत जरूरी हो जाती है, पर हर वर्ष लाखों लोगों की मृत्यु सिर्फ इसलिए हो जाती है क्योंकि उन्हें कोई डोनर नहीं मिल पाता है। रिसर्च किए गए सर्वे के अनुसार प्रत्येक 10 लाख लोगों में से 8 लोग ही अंगदान करते है।

क्या आप जानते हैं कि हमारे अंगदान करने से कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है। यही नहीं, हम सब मरने के बाद भी दूसरों के चेहरों पर मुस्कुराहट लाकर जीवित रह सकते है।

हर साल 14 फरवरी को ऑर्गन, आई और टिश्यू डोनर डे मनाया जाता है। अगर हमारे अंग किसी के काम आ जाएं, तो इससे बड़ा दान कोई हो नहीं सकता… इसके जरिए आप मरने के बाद भी किसी को जीवनदान दे सकते हैं।

अंगदान क्या है?

अंगदान एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके द्वारा जैविक ऊतकों या अंगों को एक मृत या जीवित व्यक्ति से निकालकर उन्हें किसी दूसरे के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को हार्वेस्टिंग के रूप में जाना जाता है, जिसे हम सरल शब्दों में अंगदान भी कहते हैं।

अंगदान क्यों है जरूरी –

जाने लें कि अंगदान पूरी तरह से आपकी सोच पर ही निर्भर करता है। अगर आप वाकई में दूसरों को जीवन दान करना चाहते हैं, तो अंगदान एक बेहतर विकल्प है। जरूरतमंद कोई भी हो सकता है, मित्र या फिर आपके परिवार का सदस्य।

क्या करें दान

भारत में लिवर, किडनी और हार्ट के ट्रांसप्लांट की सुविधा मौजूद है। आप हड्डियां, त्वचा, नसें,  हृदय के वॉल्व, कार्टिलेज आदि भी दान आसानी से कर सकते हैं। ध्यान रहें कि अंगदान में शरीर के अंदरूनी पार्ट जैसे कि – किडनी, फेफड़े, लिवर, हार्ट, इन्टेस्टाइन, पैंक्रियाज आदि अंग आते हैं और टिश्यू दान में आंखों, हिड्डयों और त्वचा का दान होता है।

कौन कर सकता है अंगदान –

हर वह व्यक्ति जिसे कैंसर, डायबिटीज जैसी घातक बीमारी नहीं है वह अंगदान कर सकता है। कैंसर और एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति, सेप्सिस या इन्ट्रावेनस दवाओं का इस्तेमाल करने वाले अंगदान नहीं कर सकते हैं।

अंगदान की प्रक्रिया –

अंगदान की प्रक्रिया कोई मामूली प्रक्रिया नहीं है क्योंकि इसे एक निश्चित समय के अंदर पूरा करना होता है। बता दें कि ज्यादा समय बीत जाने पर मृत व्यक्ति का अंग खराब होना शुरू हो जाता हैं।

हालांकि अंग निकालने की प्रक्रिया में लगभग आधा दिन तो लग ही जाता है। जान लें कि किसी व्यक्ति की ब्रेन डेथ की पुष्टि हो जाने के बाद डॉक्टर उसके घरवालों की इच्छा से उसके शरीर से अंग निकाल लेते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले सभी कानूनी प्रकियाएं पूरी कर ली जाती हैं।

यहां जानें पुरिवी क्षेत्र स्थित टॉप एनजीओ (NGOs) और अस्पताल (Hospitals) जहां आप अपना अंगदान कर सकते हैं –

  • ग्राम स्वराज समिति, रांची
  • अब्दुर रज्जाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स हॉस्पिटल (A.R.A.M) अपोलो अस्पताल, रांची
  • रिम्स (RIMS), रांची
  • झारखण्ड आई बैंक हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर, रांची
  • महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, जमशेदपुर
  • स्वयंसेवी संस्था साइंस फॉर सोसायटी, जमशेदपुर
  • अपोलो ग्लेनेगल्स अस्पताल, कोलकाता
  • बेले व्यू अस्पताल, कोलकाता
  • चारनॉक अस्पताल प्राइवेट, लिमिटेड
  • उत्तर कोलकाता उदय पाठे, कोलकाता
  • रिशरा इंस्टिट्यूट, कोलकाता
  • थैलेसीमिया एवं एड्स प्रीवेंशन सोसायटी, कोलकाता
  • मानसिक बारी सामाजिक पर्यावरण कल्याण सोसायटी, कोलकाता
  • श्री गुरु, कोलकाता

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