थैलेसीमिया क्या है… जानें कैसे करें इसकी पहचान और उपचार!

थैलेसीमिया एक ऐसी बीमारी है जो बच्चों को उनके माता-पिता से मिलती है। इस रोग की पहचान बच्चे में 3 महीने बाद ही पता चल पाती। आपने कुछ बच्चों को देखा होगा जिन्हें इस बीमारी के कारण उनके शरीर में रक्त यानी कि खून की कमी होने लग जाती है और सही समय पर सही उपचार ना मिल पाने पर बच्चे की मृत्यु तक भी हो जाती है।

थैलेसीमिया: क्या है यह बीमारी???

देखा जाए तो हर सामान्य व्यक्ति के शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र करीब 120 दिनों की होती है वहीं, थैलेसीमिया से पीड़ित रोगी के शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र घटकर मात्र 20 दिन ही रह जाती है जिसका सीधा असर व्यक्ति के हीमोग्लोबिन पर पड़ता है। खून की कमी हो जाने पर व्यक्ति एनीमिया का शिकार हो जाता है और हर समय किसी ना किसी बीमारी से वह ग्रसित ही रहता है।

थैलेसीमिया के कितने प्रकार –

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि थैलेसीमिया दो तरह के होते हैं – माइनर थैलेसीमिया और मेजर थैलेसीमिया। किसी महिला या फिर पुरुष के शरीर में मौजूद क्रोमोजोम खराब हो जाते हैं तब बच्चा माइनर थैलेसीमिया का शिकार बनता है लेकिन अगर महिला और पुरुष दोनों व्यक्तियों के क्रोमोजोम खराब हो जाते हैं तो फिर यह मेजर थैलेसीमिया की स्थिति बन जाता है, जिसकी वजह से बच्चे के जन्म लेने के 6 महीने बाद उसके शरीर में खून बनना बंद हो जाता है और उसे बार-बार खून चढ़वाने की जरूरत पड़ जाती है।

थैलेसीमिया की कैसे करें पहचान –

थैलेसीमिया जो है वह असामान्य हीमोग्लोबिन और रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन से जुड़ा एक ब्लड डिसऑर्डर है। इस गंभीर बीमारी में रोगी के शरीर में रेड ब्लड सेल्स कम हो जाने की वजह से वह एनीमिया का शिकार बन जाता है, जिसकी वजह से उसे हर समय कमजोरी, थकावट महसूस करना, पेट में सूजन, डार्क यूरिन, त्वचा का रंग पीला पड़ना ऐसी कुछ समस्याओं से जूढना पड़ता है।

थैलेसीमिया से बचने के लिए घरेलू उपचार –

  • अगर आप अपने बच्चे को इस गंभीर रोग से बचाना चाहते हैं तो सबसे पहले शादी से पहले ही लड़के और लड़की की खून की जांच ज़रूर से करवाएं।
  • वहीं, अगर आपने खून की जांच करवाए बिना ही शादी कर ली है तो गर्भावस्था के 8 से 11 हफ्ते के अंदर ही अपने डीएनए की जांच करवा लें।
  • माइनर थैलेसीमिया से पीड़ित व्यक्ति किसी भी सामान्य व्यक्ति की तरह अपना जीवन जीते हैं और बिना खून की जांच करवाए कई बार तो उसे पता ही नहीं चलता कि उसके खून में कोई दोष भी है। ऐसे में अगर शादी से पहले ही पति-पत्नी के खून की जांच करवा ली जाए तो काफी हद तक इस आनुवांशिक रोग से होने वाले बच्चे को बचाया जा सकता है।

थैलेसीमिया का उपचार –

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि थैलेसीमिया का इलाज, रोग की गंभीरता पर निर्भर करता है और कई बार थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों को एक महीने में 2 से 3 बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ जाती है। आइए जानते हैं कुछ उपचार –

  • बोन मैरो इंप्लांट कर के आप इस रोग का इलाज सफलतापूर्वक कर सकते हैं। इस बात का खास ध्यान रखें कि बोन मैरो का मिलान एक बेहद मुश्किल प्रक्रिया होती है।
  • इसके अलावा आप रक्ताधान, बोन मैरो इंप्लांट,  दवाएं और सप्लीमेंट्स या फिर पित्ताशय की थैली को हटाने के लिए आप सर्जरी की मदद ले सकते हैं और इस गंभीर रोग का उपचार कर सकते हैं।

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