World Earth Day: आपके अच्छे स्वास्थ्य के लिए पृथ्वी का स्वच्छ रहना कितना ज़रूरी?

आपने अपने दादा दादी को देखा होगा जो हमेशा अपनी आने वाली पीढ़ियों की चिंता किया करते हैं और उनके अच्छे और सुखद भविष्य के लिए अपनी विरासत छोड़कर जाना चाहते हैं। वहीं, हमारे माता पिता भी जितना हो सके उतना जुटाने की कोशिश करते हैं ताकि अपने बच्चों को एक अच्छी ज़िंदगी जीने में कोई परेशानी ना हो।

हम सभी अपने अपनों के बारे में कितना कुछ सोचते हैं लेकिन कभी धरती के बारे में कभी  कुछ सोचा है क्या –

दोस्तों, आज यह सवाल ज़रा अपने आप से पूछें – क्या आप अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए वैसी ही धरती, वैसा ही पर्यावरण संतुलन छोड़कर जाएंगे, जैसा आपको मिला था??? ज़रूर से जवाब ना में ही होगा। अब समय है आपके जागने का… क्योंकि आज आपने कोई कदम नहीं उठाया तो आपकी ही आने वाली पीढ़ियां बहुत कुछ चीज़ें नहीं देख पाएंगी, जो आज हमारे जीवन का अहम हिस्सा हैं या थे।

वर्ल्ड अर्थ-डे पर अपनी धरती मां के लिए कुछ करने का संकल्प अवश्य लें ताकि आप एक स्वस्थ जीवन जी सकें।

अर्थडे क्या है और कब मनाया जाता है?

अर्थडे को मनाने का कॉन्सेप्ट उस समय का है जब अमेरिका और यूएसएसआर के बीच शीत युद्ध चरम पर था और दोनों जगह एटमी परीक्षण करने की होड़ लगी हुई थी। बता दें कि यह वह दौर था जब दुनियाभर में औद्योगिक क्रांति हो रही थी और प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा था जिससे लोग काफी बीमार हो रहे थे। ऐसे में लोगों ने जागरुकता फैलाना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे यह मुहिम वर्ल्ड अर्थ-डे के रूप में उभरी। बता दें कि हर साल 22 अप्रैल को दुनियाभर में अर्थ-डे मनाया जाता है। इस मौके पर पर्यावरण सुरक्षा के संबंध में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। वर्ष 1970 में पहली बार अर्थडे मनाया गया था।

जल प्रदूषण और उससे होने वाली बीमारी –

हमारे भारत में जल प्रदूषण की समस्या सबसे बड़ी है। इस प्रदूषण के सबसे बड़े कारणों में से एक सीवर है, जिसके पानी को बिना साफ किए ही नदियों में बहा दिया जाता है जैसे कि – घरों से निकलने वाले मल-मूत्र से लेकर फैक्टरियों से निकलने वाले खतरनाक जैविक पदार्थ आदि। जल प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य से जुड़ी घातक बीमारियां जैसे कि – हैजा, टीबी, दस्त, पीलिया, डायरिया हो सकती हैं। वहीं, एक सर्वे के अनुसार भारत में होने वाली 80 फीसदी पेट की बीमारियां गंदे पानी के कारण ही होती हैं।

वायु प्रदूषण ना सिर्फ पृथ्वी को बल्कि हमारे स्वास्थ्य को भी कर रहा खराब –

वायु प्रदूषण दुनियाभर के अन्य देशों की तरह ही हमारे भारत में भी खतरनाक होता जा रहा है। लकड़ी का ईंधन, जैव ईंधन, ईंधन में मिलावट, वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुंआ और फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाला खतरनाक धुंआ इसके प्रमुख कारणों में से एक हैं। यही नहीं, हमारे देश में तो पतझड़ और फसल कटने के मौसम में खूंटियों को जलाया जाता है जिसके कारण भी जबरदस्त प्रदूषण फैलता जा रहा है, जिसके कारण आसपास से शहरों में स्मॉग की परत छा जाती है और सांस से जुड़ी कई बड़ी और गंभीर बीमारियां आपको अपना शिकार बना लेती है।

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