#WorldTobaccoDay: धूम्रपान कैसे है Silent Killer, हर साल 10 लाख लोगों की हो रही मृत्यु

वैश्विक स्तर पर दहन आधारित तंबाकू उत्पादों का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता माना जाता है भारत और तंबाकू से संबंधित बीमारी के कारण हर साल करीब दस लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। भारी भरकम कर लगाए जाने पर भी, कड़ी चेतावनी वाले लेबल लगाए जाने के बावजूद तंबाकू के उपयोग में कोई गिरावट नहीं हुई है बल्कि और धड़ल्ले से बढ़ती ही जा रही है।

इन दिनों स्कूल जाने वाले छात्र भी धूम्रपान की लत्त लगा बैठे हैं। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत दुनिया के 12 प्रतिशत धूम्रपान करने वालों का घर माना जाता है, जो 12 करोड़ धूम्रपान करने वालों का है। एक सर्वे के अनुसार भारत में हर साल तंबाकू के सेवन के कारण 10 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हो जाती है। वहीं, चौंका देने वाले आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि भारत में 16 साल से कम उम्र के 24 फीसदी बच्चों ने पिछले कुछ समय में तंबाकू का इस्तेमाल किया है और 14 फीसदी लोग अभी भी तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

धूम्रपान कैसे है अच्छी सेहत के लिए खतरनाक –

यह तो हम सभी जानते हैं कि धूम्रपान और तंबाकू का सेवन किसी भी व्यक्ति के शरीर की प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकता है और हृदय रोग, स्ट्रोक, वातस्फीति (फेफड़ों के ऊतकों का टूटना), और कई प्रकार के कैंसर जैसे – फेफड़े, गले, पेट और मूत्राशय के कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। जो लोग धूम्रपान करते हैं उन्हें ब्रोंकाइटिस और निमोनिया जैसे संक्रमणों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इन घातक बीमारियों के अलावा, कई अन्य परिणाम हैं जिनके बारे में लोगों को जानकारी नहीं है जैसे कि – अंधापन, टाइप 2 मधुमेह, स्तंभन दोष, अस्थानिक गर्भावस्था, मसूड़ों के रोग… यह सभी धूम्रपान के कुछ अन्य प्रभाव हैं जो काफी खतरनाक और तकलीफदेह होती हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि तंबाकू का उपयोग (विशेष रूप से धुआं रहित तंबाकू) आपके मुंह के कैंसर के खतरे को भी कई गुणा बढ़ाता है, जो आपके सिर और गर्दन में रक्त वाहिकाओं और लिम्फ नोड्स की प्रचुरता के कारण आक्रामक हो सकता है।

ई-सिगरेट आपके सेहत के लिए कितना है सही –

ई-सिगरेट को पूरी तरह से शुद्ध निकोटीन पर आधारित माना जाता हैं… इसका उपयोग लोगों को धूम्रपान करने से रोकने या फिर दूर करने के लिए खास रूप से किया जाता है। तंबाकू के धुएं में 74 कार्सिनोजेन्स होते हैं… यह निकोटीन है जो मनोवैज्ञानिक पदार्थ है जो हमें मनोवैज्ञानिक रूप से तंबाकू पर निर्भर करवाता है। हालांकि निकोटीन अपने आप में एक कार्सिनोजेन नहीं है, और इसलिए इसके कुछ दुष्प्रभाव भी हैं –

यह लंबे समय में उच्च रक्तचाप और अन्य हृदय की समस्या और यहां तक कि मनोभ्रंश का कारण बन सकता है। यदि दुर्व्यवहार नहीं किया जाता है, तो शुद्ध रूप से निकोटीन आधारित ई-सिगरेट के अल्पावधि नुकसान ज्यादा नहीं है, लेकिन यह कार्सिनोजेनिक क्षमता वाले सिगरेट से धूम्रपान करने वालों को दूर करने में भी आपकी मदद कर सकता है।

यूं तो तंबाकू के उपयोग के खिलाफ कुछ जागरूकता आई है, लेकिन ज्यादातर लोग तब तंबाकू लेना शुरू करते हैं जब वह अभी भी किशोर हैं या फिर कॉलेजों में प्रवेश कर रहे हैं। फेफड़े का कैंसर, जो सीधे धूम्रपान और तंबाकू से संबंधित है, सबसे आम कैंसर में से एक माना जाता है। दुर्भाग्य से, 60-70 प्रतिशत से अधिक फेफड़ों के कैंसर के मामलों का पता एक उन्नत चरण में लगाया जाता है, क्योंकि ट्यूमर को बढ़ने के लिए बहुत सारे स्थान मिल जाते हैं।

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